इंतज़ार

आज मिलने का मौका था उससे | बड़ी मुश्किल से तो हिम्मत बनायीं थी उससे मिलने की |

सुबह सुबह उठकर तैयार भी हो गया ताकि देरी ना हो जाए | अच्छा हाँ , ये तो बताना भूल ही गया कि मिलना फरीदाबाद में तय हुआ क्यूंकि उसको वही पास था और मैंने भी सोचा की वही से आगरा चला जाऊँगा |

अब गुडगाँव कहाँ आती वो |

फरीदाबाद के लिए सबसे कम वक़्त Cab लगाती है, तो बैठ गया ये सोचकर कि इंतज़ार ही कर लूंगा जल्दी पहुंचकर |

लेकिन आज तो जैसे सबने साजिश कर रखी थी |

Cab ने आधा घंटा आने मैं लगाया और ‘कुछ ज़्यादा वक़्त’ टोल और ट्रैफिक ने भी खाया |

दिमाग उसकी तरफ, आँखें घडी पर अटकी थी और धड़कने Cab से तेज़ |

'काश वो भी देरी कर दे आने में' , बस यही सोच रहा था |

क्यूंकि इंतज़ार बिलकुल पसंद नहीं था उसको |

जैसे तैसे पहुँच गया लेकिन 15 मिनट देरी से |

देखा तो वो मेरे सामने से गुजरी और जा रही थी मुझसे दूर | आवाज़ भी लगायी मैंने, लेकिन रुकी नहीं वो, सुना नहीं होगा शायद  ... और इंतज़ार भी तो पसंद नहीं था उसको |

फिर हर उस 1 मिनट को कोसा मैंने .. जो शायद बचा सकता था कहीं |

लेकिन फायदा क्या था .. वो तो चली गयी .. मुझे छोड़कर ... किसी और ट्रैन के इंतज़ार में ||

मेरी प्यारी मंगला | अहा ... मंगला एक्सप्रेस |
                                                                                                                               - GG



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