एक घड़ी बेहद पसंद है हमें
एक घड़ी पसंद है हमें | बेहद पसंद | अभी हमारे मोहल्ले में एक नई दुकान खुली है, वहीं देखा उसको | यूँ केवल ऊपर से देखोगे तो शायद बहुत ही सरल और साधारण सी लगे तुमको लेकिन अगर रुको, ठहरो, ध्यान से देखो और समझने की कोशिश करो तो शायद जान पाओगे कि वो कितनी बेशकीमती है | इतनी कीमती कि बिकाऊ नहीं है वो, साथ में पड़ी भूरे रंग की लकड़ी की पट्टी पर लिखा पाओगे | नज़र को थोड़ा इधर उधर करोगे तो तुम्हे दिखेंगी घड़ियाँ और भी, कुछ महंगी, कुछ ज़्यादा चमकदार | लेकिन वो होता है ना, कि तुम्हारा वो नाजुक सा दिल कहाँ जाकर अटका है, तो बस हमें वही पसंद आई | मन को इतनी भाती है वो घड़ी कि हर रोज़ कोई ना कोई बहाना ढून्ढकर उस दुकान के नज़दीक से गुजरा करते हैं और जब उस दुकान का मालिक वहाँ नहीं होता तो घंटो तक उसी को ताकते रहते | देखते रहते कि कैसे एक तरफ शान्ति से बैठकर भी पूरी दुनिया को अपने हिसाब से चला रही है | दिन में जितनी बार वो मिनट वाली सुई नहीं घूमती होगी, उससे ज़्यादा तो हम वहाँ घूमा करते हैं | और हाँ एक बात और, वो घड़ी इतनी ख़ास है कि अगर कोई उसकी कीमत लगाता भी, तो भी शायद हम खरीद ना पाते | सुना है...