एक घड़ी बेहद पसंद है हमें
एक घड़ी पसंद है हमें | बेहद पसंद | अभी हमारे मोहल्ले में एक नई दुकान खुली है, वहीं देखा उसको | यूँ केवल ऊपर से देखोगे तो शायद बहुत ही सरल और साधारण सी लगे तुमको लेकिन अगर रुको, ठहरो, ध्यान से देखो और समझने की कोशिश करो तो शायद जान पाओगे कि वो कितनी बेशकीमती है | इतनी कीमती कि बिकाऊ नहीं है वो, साथ में पड़ी भूरे रंग की लकड़ी की पट्टी पर लिखा पाओगे | नज़र को थोड़ा इधर उधर करोगे तो तुम्हे दिखेंगी घड़ियाँ और भी, कुछ महंगी, कुछ ज़्यादा चमकदार | लेकिन वो होता है ना, कि तुम्हारा वो नाजुक सा दिल कहाँ जाकर अटका है, तो बस हमें वही पसंद आई | मन को इतनी भाती है वो घड़ी कि हर रोज़ कोई ना कोई बहाना ढून्ढकर उस दुकान के नज़दीक से गुजरा करते हैं और जब उस दुकान का मालिक वहाँ नहीं होता तो घंटो तक उसी को ताकते रहते | देखते रहते कि कैसे एक तरफ शान्ति से बैठकर भी पूरी दुनिया को अपने हिसाब से चला रही है | दिन में जितनी बार वो मिनट वाली सुई नहीं घूमती होगी, उससे ज़्यादा तो हम वहाँ घूमा करते हैं | और हाँ एक बात और, वो घड़ी इतनी ख़ास है कि अगर कोई उसकी कीमत लगाता भी, तो भी शायद हम खरीद ना पाते |
सुना है वो उस दुकान के मालिक को विरासत में मिली थी और काफी सालों से उसने उसे संभाल कर रखा है | थोड़ा और जानने की कोशिश की तो पता लगा कि वो दुकान वाला मालिक उस घड़ी को किसी अपने जैसे ही शख्श को देना चाहता है जिसे उनके जैसे ही तौर तरीके पता हो ताकि उसका उतना ही ध्यान रखा जा सके जितना उन्होंने अब तक रखा है| उस मालिक के लिए वो घड़ी, उसकी दुकान की शान जो है | अब सीधा जाकर मांगेंगे तो हम भगा दिए जाएंगे क्यूंकि हमें उनके तौर तरीके जो नहीं पता हैं | और ये बात वो साहब बखूबी जानते हैं |
तो कैसे भरोसा दिलाएँ कि हम भी संभाल कर रख सकते हैं उनकी इस विरासत को | अपनी कलाइयों को इतना मजबूत कर लेंगे कि वो कभी खुद को अकेला ना समझे और उसके हर हिस्से को हर वक़्त हमारी मौजूदगी का एहसास होता रहे | यकीन रहे उसे कि वो बिल्कुल सुरक्षित है, हमारे ही साथ है हमेशा | दफ्तर से लौटने पर यूँ ही कहीं भी उतार कर फेंक नहीं देंगे बल्कि अपने सिरहाने के पास ही रखेंगे, संभाल कर | कैसे बताएं कि गर धूप में झुलसे हम तो छाता उसी हाथ से पकड़ेंगे जिस हाथ में उसको सजाया होगा | और बारिश की बूँद का जो एहसास हुआ तो सीधा उतारकर अपने सीने के पास वाली जेब में रख लेंगे ताकि वो भी सलामत रहे, आगे का साथ देने के लिए |
ये सब यकीन उस दुकानदार को होगा या नहीं, वो तो नहीं जानते , लेकिन उस बेजान घड़ी में अगर कोई जान डाल दे तो शायद वो सबको चिल्ला कर बता दे कि ये ग्राहक रोज वही एक अनहोनी को होनी करने की उम्मीद में आता है |
हाँ गर कोई उसमे जान डाल रहा हो तो बताना मुझे | दौड़ा चला आऊंगा उस दुकान पर ये पूछने उससे कि क्या वो खुद को मेरे हाथों की कलाई पर महफूज़ समझती है | क्या उसको इतना भरोसा है कि ये ग्राहक केवल शौक के लिए चीज़ें नहीं खरीदना चाहता | क्या वो घड़ी मेरी ज़िन्दगी भर का समय बताने के लिए तैयार है | क्यूंकि ये महज़ कोई एक सौदा नहीं है, खरीद नहीं रहे हम, विरासत में चाहिए हमको, उस घड़ी की एक तरफ़ा मर्ज़ी के साथ, ठीक उस दुकान के मालिक की तरह |
जी हाँ, एक घड़ी है जो बेहद पसंद है हमें ||
-GG

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