चैन की नींद
(a story from somewhere around 2009)
ये उन दिनों की बात है जब हमारे घर के बाहर कुत्ते/कुतिया रहा करते हैं | दरअसल हमारा घर उस चॉल के पुराने मकानों में से एक होता था जो कितने ही सालों से मिट्टी की बुनियाद पर ही खड़े थे | अब ये गली के बफादार जानवर ना तो घर के होते थे ना घाट के | जब मन किया तो आ गए और नहीं तो कहो पूरा दिन, दिखाई भी न दे आपको | पड़ोस की एक छोटी सी कोठरी में घर बना लिया था इन्होने अपना | काटने या डरने जैसी तो कोई परेशानी नहीं थी इनसे लेकिन सबसे बड़ी समस्या थी की ये घर के बाहर गंदगी कर जाते थे | अब मोदीजी की बात कहाँ पता थी उनको जो शौचालय के बारे में सोचते | इनका तो एक ही सिद्धांत था " जहाँ लगा, वहाँ हगा " |
पूरी पड़ोस इनकी गंदगी से परेशान थी और अब इस समस्या का हल किसी को समझ नहीं आ रहा था क्यूंकि इन्हे मारने का सवाल ही नहीं उठता था ,और कहीं दूर ले जा कर छुडवा दो तो ये वापस आ जाते थे | फिर सब यही सोचते थे की बूढ़े होकर अपने आप ही मर जाएंगे | लेकिन ऐसा होने से पहले वो अपने बच्चों को जन्म दे जाते थे और फिर उनके मरने के बाद, यही परेशानी उनके बच्चों से होने लगती |सिलसिला ऐसे ही चलता रहता लेकिन कुछ उपाय समझ ही नहीं आ रहा था |
अब एक ऐसी ही कुतिया हमारी पड़ोस में रह रही थी और बीती रात ही उसने भी अपने बच्चो को जन्म दे दिया | जैसे ही सबको ये पता लगा की गंदगी का आतंक ३ गुना बढ़ने वाला है, सब परेशान से हो गए | बैठक बुलाई और सुझाव् रखे गए | तभी किसी ने सोचा की क्यों न नवजात स्थिति में ही बच्चो को कहीं भिजवा दें ताकि वो वापस ही ना आ पाएं | सबकी सहमती हुई और अगले दिन सफाई वाले को बुलाकर इस कार्य को अंजाम दिया गया | अब थोड़े ही दिनों में बूढ़ी कुतिया भी मर ही जाएगी और हमेशा की दिक्कत ख़त्म | सबकी आंखों की चमक, सूरज की रौशनी के आगे दिखाई तो नहीं दे रही थी, लेकिन सबकी ख़ुशी थी एक तरफ़ा | हालाँकि किसे पता था रात मेरी काली होने वाली थी |
घर के बड़े तो लगभग सो ही चुके थे और मैं भी उस रात में खुद को खो देने वाला था की मुझे किसी के रोने की आवाज़ सुनाई दी | ध्यान से सुना तो वो उस माँ की रोने की आवाज़ थी जिसके बच्चो को हम सबने ख़ुशी-ख़ुशी उससे दूर कर दिया था | उसके रोने की आवाज़ कभी धीमी होती तो कभी तेज़, जैसे पूरी पड़ोस के कोने-कोने में अपने बच्चों को ढूंढ रही हो | ये कहना तो एक दम गलत होगा की मेरी तड़प उससे ज़्यादा थी लेकिन मैं भी पूरी रात सो नहीं पाया | गुस्सा तो बहुत तेज़ आ रहा था खुद पर कि मैंने ऐसा होने ही क्यों दिया |
सुबह हुई तो सबसे पहले मैंने उस सफाई वाले का पता किया जो उन बच्चों को लेकर गया था | साइकिल उठाई और निकल गया उन बच्चो को ढूंढ़ने - जीवनी मंडी, हाँ वही छोड़ कर आया था वो उन्हें | लेकिन कुछ ना पता लगा और हताश होकर घर वापस | सच बोलू तो बुरा इस बात का नहीं लग रहा था की उसके बच्चे कैसे होंगे या किस हाल में होंगे , बल्कि वजह ये थी कि वो फिर रोएगी और मुझे किसी का रोना बिलकुल पसंद नहीं था | इंसान हो या जानवर | दिन तो स्कूल में निकला लेकिन फिर रात हुई, वो रोई, मैं फिर तड़पा और फिर हम दोनों की एक और रात काली हुई |
सुबह हुई, बस में बैठा, स्कूल गया और फिर वहां से ट्यूशन वो भी देर तक | अरे यार इस फिजिक्स का क्या करू, समझ ही नहीं आती | घर आया , खाना खाया और सो गया | फिर सुबह हुई, बस में बैठा तो देखा एक बच्चा स्कूल न जाने के लिए रो रहा था | ओह shit | कल रात वो रोई क्यों नहीं | दिल घबरा गया | वो ठीक तो है न | स्कूल के बाद सीधा भागा उसकी कोठरी को देखने के लिए और ये क्या वो तो वहां दिखी ही नहीं |
या यूँ कहलो कि उसके बच्चो ने उसको छुपा लिया था | पता नहीं वो खुद आ गए या कोई उन्हें छोड़ गया | कभी पता करने की कोशिश भी नहीं की |ये भी नहीं पता कि खुदा की वो रहमत मुझ पर थी या उस पर,
लेकिन उस रात हम दोनों चैन से सोये ||
- G.G.
(photo taken from internet)

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